Opportunities in Naturopathy

नेचुरोपैथी में नौकरी की संभावनाएं


  • सरकारी अथवा प्राइवेट हॉस्पिटल में जॉब कर सकते हैं।
  • खुद का नैचरोपैथी हॉस्पिटल खोल सकते हैं।
  • स्कूलों में योग टीचर के रुप में कार्य कर सकते है।
  • अपना योग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोल सकते हैं।

सरकारी नौकरी में सभी पद्धतियों में बेतनमान एक समान हैं और समाज में भी अब नेचुरोपैथी डॉक्टर की डिमांड है। 

नेचुरोपैथी में कैरियर शुरू करने से आर्थिक अवसर बहुत अधिक हैं।

  • नेचुरोपैथिक पाठ्यक्रम आपको मधुमेह, कैंसर, गुर्दे की विफलता आदि से पीड़ित लोगों की मदद करने या उन बीमारियों के साथ बेहतर जीवन जीने में मदद करने के लिए ज्ञान और कौशल प्रदान करते हैं।  नेचुरोपैथी में शिक्षा ग्रहण कर आप बेहतर चिकित्सक बनते हैं, जिससे समाज में आप दूसरे चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों से ज्यादा इज्जत और पैसा कमा सकते हैं.
  • नेचुरोपैथी में उपचार के परिणाम एलॉपथी से बेहतर है- कैंसर, गुर्दे की विफलता, दिल के दौरे आदि जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार सीखें. जरूरतमंद गरीबों की मदद के लिए नेक पेशे को अपनाएं. गंभीर बीमारी में नेचुरोपैथी का बेहतर परिणाम है।
  • नेचुरोपैथी में सीरियस और असाध्य रोगों में जल्द लाभ मिलता है 
  • जीवन रक्षक उपायों में नेचुरोपैथी, दूसरी किसी भी पद्धति से बेहतर है
  • प्रभावी उपचार प्रदान करके अपने परिवार और समाज को कॉर्पोरेट अस्पताल की लूट से बचाएं।

नेचुरोपैथी के कोर्स की जानकारी

प्राकृतिक चिकित्सा के पाठ्यक्रम

  • Biochemistry
  • Human anatomy
  • Human physiology
  • Philosophy of nature cure
  • Principle of yoga
  • Pathology
  • Microbiology
  • Community medicine
  • Basic pharmacology
  • Forensic medicine & toxicology
  • Philosophy & practice of yoga
  • Colour & magneto therapy    
  • Naturopathic & modern diagnosis
  • Psychology & basic psychiatry
  • Acupuncture, acupressure, reflexology, 
  • Reiki, & Pranic healing
  • Yoga & physical culture
  • Nutrition & herbology
  • Manipulative therapies
  • Yoga therapy
  • Obstetrics & gynaecology
  • Hydrotherapy & mud therapy
  • Fasting & diet therapy
  • Clinical naturopathy
  • Emergency medicine, 
  • minor surgery and first aid
  • Physical medicine and rehabilitation
  • Research methodology and recent advances
  • Hospital management

सबसे अधिक वैज्ञानिक और परिणाम उन्मुख चिकित्सा है- नेचुरोपैथी। आप कैंसर, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, गठिया, SLE, बुखार, आपातकालीन चिकित्सा जैसे आघात इत्यादि का इलाज सीख सकते हैं। आप प्राकृतिक को एलोपैथी के साथ तुलना कर देखेंगे कि प्राकृतिक चिकित्सा उपचार बहुत बेहतर है। 

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास उतना ही पुराना है जितना स्वयं प्रकृति। यह चिकित्सा विज्ञान आज की सभी चिकित्सा प्राणालियों से पुराना है। अथवा यह भी कहा जा सकता है कि यह दूसरी चिकित्सा पद्धतियों कि जननी है। इसका वर्णन पौराणिक ग्रन्थों एवं वेदों में मिलता है, अर्थात वैदिक काल के बाद पौराणिक काल में भी यह पद्धति प्रचलित थी।

आधुनिक युग में डॉ॰ ईसाक जेनिग्स (Dr. Isaac Jennings) ने अमेरिका में 1830 के दशक में दवा को ‘पूर्ण भ्रम’ (gross delusion) कहा था । चिकित्सा सम्बन्धी उनके पूर्व प्रयोगों से उन्हें विश्वास हो गया था कि केवल प्रकृति ही अपनी खराब हुई ‘मशीनरी’ को ठीक कर सकती है।[1] जोहन बेस्पले ने भी ठण्डे पानी के स्नान एवं पानी पीने की विधियों से उपचार देना प्रारम्भ किया था।

महाबग्ग नामक बोध ग्रन्थ में वर्णन आता है कि एक दिन भगवान बुद्ध के एक शिष्य को सांप ने काट लिया तो उस समय विष के नाश के लिए भगवान बुद्ध ने चिकनी मिट्टी, गोबर, मूत्र आदि को प्रयोग करवाया था और दूसरे भिक्षु के बीमार पड़ने पर भाप स्नान व उष्ण गर्म व ठण्डे जल के स्नान द्वारा निरोग किये जाने का वर्णन 2500 वर्ष पुरानी उपरोक्त घटना से सिद्ध होता है।

प्राकृतिक चिकित्सा के साथ-2 योग एवं आसानों का प्रयोग शारीरिक एवं आध्यात्मिक सुधारों के लिये 5000 हजारों वर्षों से प्रचलन में आया है। पतंजलि का योगसूत्र इसका एक प्रामाणिक ग्रन्थ है इसका प्रचलन केवल भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में भी है।

प्राकृतिक चिकित्सा का विकास (अपने पुराने इतिहास के साथ) प्रायः लुप्त जैसा हो गया था। आधुनिक चिकित्सा प्राणालियों के आगमन के फलस्वरूप इस प्रणाली को भूलना स्वाभाविक भी था। इस प्राकृतिक चिकित्सा को दोबारा प्रतिष्ठित करने की मांग उठाने वाले मुख्य चिकित्सकों में बड़े नाम पाश्चातय देशों के एलोपैथिक चिकित्सकों का है। ये वो प्रभावशाली व्यक्ति थे जो औषधि विज्ञान का प्रयोग करते-2 थक चुके थे और स्वयं रोगी होने के बाद निरोग होने में असहाय होते जा रहे थे। उन्होने स्वयं पर प्राकृतिक चिकित्सा के प्रयोग करते हुए स्वयं को स्वस्थ किया और अपने शेष जीवन में इसी चिकित्सा पद्धति द्वारा अनेकों असाध्य रोगियों को उपचार करते हुए इस चिकित्सा पद्धति को दुबारा स्थापित करने की शुरूआत की। इन्होने जीवन यापन तथा रोग उपचार को अधिक तर्कसंगत विधियों द्वारा किये जाने का शुभारम्भ किया।

प्राकृतिक चिकित्सा संसार मे प्रचलित सभी चिकित्सा प्रणाली से पुरानी है। प्राचीन ग्रंथों मे जल चिकित्सा व उपवास चिकित्सा का उल्लेख मिलता है। पुराण काल मे (उपवास) को लोग अचूक चिकित्सा माना करते थे।

प्राकृतिक चिकित्सा का विदेशों मे विकास

भारत में प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति का जन्म हुआ। तथा इसकी उपयोगिता की महत्ता भी भारत में अति प्राचीन समय से चली आ रही है। जिन-2 स्वास्थ्य सम्बन्धी प्राकृतिक क्रियाओं का हम प्रयोग कर रहे हैं वे सभी उपचार की पद्धतियां पूर्वावस्था में प्राचीन भारत में विद्यमान थी। भारत में ही रोग निवारण के लिए इस पद्धति का प्रयोग नहीं किया वरन् अन्य कई देशों में भी इस पद्धति का प्रयोग आज किया जा रहा है। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति भारत की ही देन है परन्तु कुछ कारणों तथा अन्य विकासों के प्रभावानुसार यह पद्धति भारत में लुप्त हो गई। इसके बाद इसके पुनः निर्माण का श्रेय विदेशों (पाश्चात्य देशों) को ही है।

18वीं शताब्दी के मध्य से कुछ लोगों के प्रयास के फलस्वरूप प्राकृतिक चिकित्सा का प्रारम्भ तथा विकास फिर शुरू होने लगा तथा हम इस चिकित्सा को पुनः जानने लगे। इस पद्धति के पुनरूथान में जिन महान और प्रभावशाली व्यक्तियों का योगदान है वह पहले से ही रोगों को ही उपचार के लिए औषधियों का प्रयोग करते थे परन्तु औषधियों के प्रयोग के बाद भी रोगों पर सफलता न पा सकने तथा उसके प्रतिकूल प्रभावों को जानने के बाद और स्वयं पर भी औषधि चिकित्सा की प्रणाली के कटुफल चखने के बाद प्राकृतिक चिकित्सा की शरण ग्रहण कर स्वस्थ जीवन जीने लगे। इन्होंने इस पद्धति के चमत्कारों से प्रभावित होने के कारण इस पद्धति के प्रचार-प्रसार और विकास में लग कर प्राकृतिक चिकित्सा को नया जन्म दिया।

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास एवं विकास

 भारत में प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति का जन्म हुआ। तथा इसकी उपयोगिता की महत्ता भी भारत में अति प्राचीन समय से चली आ रही है।  

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